शान और परम्परा के संगम हैं महिलाओं के लिए आकर्षण गहने ही सुंदरता को चार चाँद लगाते हैं
शान और परम्परा के संगम हैं महिलाओं के लिए आकर्षण गहने ही सुंदरता को चार चाँद लगाते हैं
औरतों का शरीर और मन ,पुरुषों की अपेक्षा कोमल, संवेदनशील माना गया है. औरतों के शरीर में हारमोंस के उतार चढाव पर काफी प्रभाव होता है. घर परिवार की जिम्मेदारियों की बात की जाय तो औरतें तन-मन से घर के प्रति समर्पित रहती है !ऐसे में प्राचीन ऋषियों ने कुछ ऐसे उपकरण बनाये जिससे औरतों के मन और स्वास्थ्य की रक्षा हो सके. प्रचलन में बढ़ने पर इनको सुन्दर गहनों का रूप मिलने लगा और यह नियमपूर्वक पहने जाने लगे... सोने के गहने गर्मी और चांदी के गहने ठंडी का असर शरीर में पैदा करते हैं. कमर के ऊपर के अंगों में सोने के गहने और कमर से नीचे के अंग में चांदी के आभूषण पहनने चाहिए. लेकिन आज के समय में महंगाई के समय सोना चांदी का गहना लेना सभी के लिए सम्भव नहीं !
इसलिए गहनों के लिए शो रूम में हर खुशी के लिए न्यूनतम दर व शानदार डिजाइनों में आर्टिफिशियल गहनों का विशाल रेंज उपलब्ध है।
श्रीमती आकांक्षा ओझा ने इसकी विशेषता बताते हुए कहा कि आज के दौर महिलाओं में सौंदर्य बढ़ाने के लिए सस्ते और सुंदर गहने के प्रति काफी आकर्षण है। ये हमारी संस्कृति, परंपरा, भावनाओं और यादों से जुड़े होते हैं।
कई आभूषण पीढ़ियों तक संभालकर रखे जाते हैं और परिवार की विरासत बन जाते हैं।आज गहनों का स्वरूप काफी बदल चुका है।
अब केवल सोने-चांदी ही नहीं, बल्कि मोती, ऑक्सीडाइज़्ड, जर्मन सिल्वर, ब्रास और आकर्षक आर्टिफिशियल ज्वेलरी के अनगिनत विकल्प उपलब्ध हैं।
हमारे यहां उपलब्ध हैं कुंदन, पोलकी और मीनाकारी जैसे पारंपरिक डिजाइन रोज़ाना पहनने के लिए हल्की चेन, पेंडेंट अंगूठियाँ और इयररिंग्स ऑक्सीडाइज़्ड, सिल्वर और फ्यूज़न ज्वेलरी के लेटेस्ट ट्रेंड्स हर उम्र और हर अवसर के लिए शानदार कलेक्शन के साथ आर्टिफिशल गहनों के नवीन शोरूम में उपलब्ध है ।
अब अपने शहर वाराणसी में ही एक से बढ़कर एक खूबसूरत है और ट्रेंडी आर्टिफिशियल गहने, वह भी आपके बजट के अनुसार जिसमें आप अपने पसंदीदा गहनों के लिए भारी खर्च की जरूरत नहीं पड़ेगी कम बजट में भी शानदार लुक और बेहतरीन डिज़ाइनों का आनंद लें सकती हैं साथ ही हर वर्ग के लिए मोती से लेकर एक ग्राम सोने तक के गहने उपलब्ध है तथा शादी ब्याह के अवसर पर होम डिलीवरी की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने इसका पूरा श्रेय अपने पति, बड़ी बहन डॉ उर्वशी ओझा को देती है।
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