ऑपरेशन के दौरान क्यों घबराहट में रहता है मरीज ? डा. पी. एस वर्मा स्पेसलिस्ट न्यूरो सर्जन ने हमारी चैनल की टीम बताया मुख्य कारण
ऑपरेशन के दौरान क्यों घबराहट में रहता है मरीज ? डा. पी. एस वर्मा स्पेसलिस्ट न्यूरो सर्जन ने हमारी चैनल की टीम बताया मुख्य कारण
हमारे चैनल से वार्तालाप के दौरान डा. वर्मा बताया कि न्यूरोसर्जरी (Brain/Spine Surgery) एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सर्वोच्च स्तर की सटीकता और सावधानी की आवश्यकता होती है।
वही मरीज किसी भी तरह की सर्जरी से कतराता है। क्योंकि, एक तो इसमें पैसा काफी लगता है और ऊपर से रिकवरी में समय लग जाता है। इसके मरीज के अंदर संयम होना चाहिए यह अत्यंत जरूरी होता है।
डा. वर्मा कहते है चिकित्सक को मरीज को सही मोटिवेशन देना चाहिए है, ऐसे मरीज का कंफ्यूजन दूर हो जाता है उनका सही तरह से इलाज होगा।
डा. वर्मा ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान संक्रमण से बचाव, मस्तिष्क के नाजुक हिस्सों की सुरक्षा और स्थिर महत्वपूर्ण संकेतों (BP, ऑक्सीजन) को बनाए रखना मुख्य सावधानियां हैं।
मरीज आमतौर पर एनेस्थीसिया के कारण बेहोश होते हैं, लेकिन वे सर्जरी से पहले सर्जन की काबिलियत, सफलता दर और दर्द को लेकर आशंकित होते हैं।
डा. वर्मा ने बताया कि उनके हॉस्पिटल अच्छी व्यवस्थाओं होने के नाते मेरे पास न्यूरो सर्जरी से सम्बंधित प्रतिरोज सैकड़ो मरीज आते हैं। हमारे यहां अच्छे से इलाज किया जाता है।
न्यूरोसर्जरी के दौरान प्रमुख सावधानियां बरतना चाहिए (During Surgery)
बाँझपन (Sterility): संक्रमण (Infection) को रोकने के लिए ओटी को पूरी तरह से कीटाणुरहित रखना।
मस्तिष्क की निगरानी (Neurological Monitoring): सर्जरी के दौरान, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई महत्वपूर्ण तंत्रिका क्षति न हो, सर्जन अक्सर जागृत अवस्था में (Awake Craniotomy) भी ऑपरेशन करना चाहिए, जहाँ मरीज से बात की जाती है।
रक्तस्राव और सूजन नियंत्रण (Bleeding/Swelling Control)
मस्तिष्क की परतें रक्त या हवा के संपर्क में आने से प्रभावित न हों, और स्टेरायडल दवाओं (Dexamethasone) का उपयोग सूजन को कम करने के लिए किया जाना चाहिए।
एनेस्थीसिया टीम: विशेष सांस लेने और हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ एनेस्थेटिस्ट की निरंतर उपस्थिति रहना चाहिए।
National Brain Tumor Society
सर्जरी के दौरान/पहले मरीज की सोच और अनुभव (Patient's Perspective)
अत्यधिक डर और चिंता: मरीज के मन में अक्सर यह डर होता है कि सर्जरी के बाद वे वैसे ही रह पाएंगे या नहीं (लकवा, याददाश्त) ऐसे में पल मरीज को मोटिवेट करतें रहना चाहिए।
सर्जन पर भरोसा: डा. पी.एस वर्मा कहते हैं कि मरीज सर्जन के अनुभव और पिछले सफल मामलों के बारे में चाहिए, इसीलिए कई लोग पहले से ही सर्जन के बारे में जानकारी रखते हैं व अपने सर्जन के विषय में जानकारी रखनी चाहिए।
दर्द और आराम की चिंता: डा. वर्मा ने कहा अक्सर व सोचते हैं कि सर्जरी कितनी दर्दनाक होगी, हालांकि आमतौर पर सिर की सर्जरी में खोपड़ी के अंदर दर्द की नसें न होने के कारण दर्द कम होता है।
रिकवरी और भविष्य: वे रिकवरी के समय, अस्पताल में रुकने की अवधि, और सामान्य जीवन में लौटने (काम पर वापसी) को लेकर चिंतित रहते हैं।
सर्जरी से पहले (Pre-op) आवश्यक तैयारी:
दवाओं का समायोजन: खून पतला करने वाली दवाएं बंद करना और दौरे की रोकथाम के लिए दवाएं शुरू करना।
मानसिक तैयारी: परिवार के साथ अपनी इच्छाएं साझा करना और एक व्यक्ति को कम्युनिकेशन के लिए नियुक्त करना।
ऑपरेशन के बाद मरीज के आंखों में खुशी के आंसू के साथ मरीज का एक ही सवाल होता है कि आज एक अच्छे सर्जन के पास आया हमारी हमारे समस्याओं का निस्तारण हो गया।
वही इलाज के दौरान जिस मरीज की जान बचाने को लेकर अपनी पूरी काबलियत से कार्य करता है। लेकिन जब चिकित्सक की शुल्क देने की बात आती हैं तो उसे वही इलाज महंगा लगता है।
लेकिन डा . पी.एस. वर्मा कहते हैं ईश्वर ने हमें इस धरती पर लोगों की सेवा के लिए भेजा है। पैसे तो आते जाते रहेंगे ईश्वर तो उतना हमेशा भेज देता जितना उस ईश्वर की इच्छा होती है
रिपोर्ट- युवराज जायसवाल.. वाराणसी
International Nurses Day was celebrated at Popular College of Nursing and Paramedical Institute Bachhav Varanasi with the theme Our Nurses Our Future The Economic Power of Care