•   Thursday, 26 Feb, 2026
Open gambling worth lakhs of rupees in Dudh Satti of Varanasi police station Kotwali area DCP office just 100 steps away ACP office just a few steps away yet gambling openly..

वाराणसी थाना कोतवाली क्षेत्र के दूध सट्टी में खुलेआम लाखों रुपए जुए का खेल मात्र 100 कदम दूरी पर डीसीपी ऑफिस, कुछ ही कदम एसीपी ऑफिस फिर भी खुलेआम जुआ..

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  Varanasi ki aawaz

वाराणसी थाना कोतवाली क्षेत्र के दूध सट्टी में खुलेआम लाखों रुपए जुए का खेल मात्र 100 कदम दूरी पर डीसीपी ऑफिस, कुछ ही कदम एसीपी ऑफिस फिर भी खुलेआम जुआ..

वाराणसी वसूली तंत्र की जकड़न में पूरा पुलिस महकमा फेल

जुआ के कारोबार में पूरा जकड़ा वाराणसी पुलिस तंत्र


वाराणसी:- जिसे धर्म आध्यत्म और संस्कृति की नगरी कहा जाता है, आज एक अलग ही कारण से चर्चा में है। 

स्थनीय लोगों की नजर में यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र अब जुआ, वेश्यावृत्ति वाले शहर के नाम से जाना जाने लगा है

स्थानीय लोगों का आरोप हैं कि कमिश्नर से लेकर डीसीपी और थानों तक का तंत्र “वसूली” की संस्कृति में डूबा नजर आ रहा है है। 

सवाल यह उठता है कि क्या कानून का डंडा अब व्यवस्था बनाए रखने के लिए है या वसूली जुआ खेलवाने के लिए ?

शहर के व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों के बीच यह चर्चा आम है कि बिना “पुलिसिया सेटिंग” के कोई इतना बड़ा जुए का सिंडिकेट नही चला सकता

गिरफ्तारी, दबिश, जांच—हर प्रक्रिया में नियमों से ज्यादा “अत्यधिक रकम” की चर्चा होती है, जो दे देता है, वह कही भी कुछ भी अनैतिक कार्य कर सकता है

कमिश्नर कार्यालय से लेकर डीसीपी स्तर तक जवाबदेही तय करने की जरूरत है वैसे जनता भी जनता की नजर में पूरी व्यवस्था फेल हैं। 

यदि अधीनस्थ अधिकारी खुलेआम वसूली में मस्त हैं, तो क्या उच्च अधिकारी अनजान हैं? 
या फिर यह सब मौन स्वीकृति से चल रहा है? 
यह वही शहर है जहां कानून व्यवस्था की मिसाल दी जाती थी, लेकिन अब व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे अधिक प्रभावित छोटे कारोबारी हैं। जो प्रतिदिन जुए के खेल के शिकार हो रहे है.उनकी घर गृहस्थी चौपट हो रही है

आम-जनमानस में डर का माहौल ऐसा कि शिकायत करने वाला खुद ही निशाने पर पुलिसिया आपराधिक साठगांठ के कारण आ जाता है।

लोकतंत्र में प्रशासन जनता का सेवक होता है, मालिक नहीं 

अगर पुलिसिया वर्दी व डंडा केवल डराने और पैसा वसूलने का प्रतीक बन जाए, तो यह न केवल कानून की आत्मा के खिलाफ है, बल्कि  वर्तमान शासन की साख पर भी सीधा आघात है !

जरूरत है कि इन जुआ कारोबारियों पर सीधी कार्यवाही हो खानापूर्ति करने वाला कार्य न हो। 

एक तरफ पुलिस कमिश्नर वाराणसी की छवि सुधारने में दिन रात एक कर रहे हैं वही उनके अधीनस्थ उनकी छवि को धूमिल करने का कार्य कर रहे हैं

वाराणसी में पुलिस वसूली का संगठित तंत्र काम कर रहा है। अगर हां, तो जिम्मेदारी तय हो और सख्त कार्रवाई हो।

क्योंकि वाराणसी शहर पूछ रहा है—

कानून व्यवस्था बिकेगा या न्याय व्यवस्था भी जिंदा रहेगा?

स्थानीय सूत्र के अनुसार पुलिस वालों का महीने वाला वसूली की सेटिंग है जिसकी जानकारी सभी अधिकारियों को है और ऊपर तक भी पहुंचता है ! 
शहर में बडी चर्चा है की लाखों का महीना और बड़े साहेब तक पहुंचाने का है माध्यम खुलकर हो रही है दलाली है लेकिन सवाल उठता है यह बड़े साहब है कौन!

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे कोतवाली थाने के सौ कदम के दूरी जुए का इतना बड़ा खेल कैसे हो रहा है.. कितना पैसा थानेदार व स्थानीय चौकी तक पहुंच रहा है

खुले में कानून का मखौल क्यों पीछे सिर्फ वसूली तंत्र ही जिम्मेदार है ! 

वही स्थनीय लोगो का कहना है वाराणसी एसओजी-2 उच्च अधिकारियों का आदेश मिलते ही सिर्फ कार्यवाही के नाम सिर्फ खानापूर्ति करती है..
आम जनता ने कहा कि अगर स्प्ष्ट तौर पर कहा जाए तो एसओजी-2 वाराणसी में फेल हो चुकी हैं

रिपोर्ट- युवराज जायसवाल.. वाराणसी
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