•   Thursday, 18 Jun, 2026
In protest against the proposed PSP industrial project in Sonbhadra against the brokers who are doin

सोनभद्र आदिवासी के कंधे पर बंदूक रखकर सौदा कर रहे दलालों विरुद्ध सोनभद्र में प्रस्तावित PSP औद्योगिक परियोजना के विरोध

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  Varanasi ki aawaz

विकास रोकोगे तो गरीब पिसेगा: सोनभद्र का सच

खनन से जंगल गया, फैक्ट्री से रोजगार आएगा!

वाराणसी की आवाज से श्रीराम शुक्ला की विशेष रिपोर्ट

सोनभद्र:- आदिवासी के कंधे पर बंदूक रखकर सौदा कर रहे दलालों विरुद्ध सोनभद्र में प्रस्तावित PSP/औद्योगिक परियोजना के विरोध पर अब विकास समर्थक आवाजें तेज हो गई हैं। भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष यादवेंद्र दत्त द्विवेदी व अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि जनपद में औद्योगिक विकास का विरोध "अनावश्यक और वामपंथी विचारधारा" से प्रेरित है, जो सीधे देश की अर्थव्यवस्था और गरीब आदिवासियों के हित के खिलाफ है।
विकास समर्थकों के 5 तर्क जिन पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए:
1. रोजगार vs बेरोजगारी: रेणुकूट, अनपरा, ओबरा की तरह नई फैक्ट्रियों से शहर बसेंगे। आदिवासी बच्चों के लिए स्कूल-कॉलेज, अस्पताल खुलेंगे। जमीन की कीमत कौड़ी से करोड़ों में जाएगी।
2. असली दुश्मन खन : वन-पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान अवैध खनन से हो रहा है, मजदूरों की जान जा रही है। पर उसके खिलाफ आंदोलन नहीं, क्योंकि वहां "हित साध रहे हैं"।
3. दलालों का दोहरा खेल : आरोप है कि कुछ नेता आदिवासियों को भड़का कर "कंधे पर बंदूक" रख रहे हैं। स्वार्थ सिद्ध होते ही इन्हें "कहीं का नहीं छोड़ेंगे"। उधर से भी डील, इधर से भी माल।
4. विदेशी ताकतों का एंगल : पोस्ट में "रोमा और विदेशी ताकतों" के शामिल होने का जिक्र, जिससे जनपद का विकास रुक रहा।
5. आदिवासियों से अपील : "मूल निवासियों को समझना होगा - विकास से उत्थान होगा। बहकावे में न आएं वरना न इधर के रहेंगे न उधर के।"
विकास के नाम पर जनपद में हो रहे खेल को देखते हुए भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष एवं उनके समर्थकों ने प्रशासन से मांग की है कि**** 
दोहरे मापदंड की जांच हो : खन माफिया पर कार्रवाई तेज हो। अगर पर्यावरण चिंता है तो पहले खनन बंद हो।

जागरूकता अभियान : DM-SP आदिवासी गांवों में जाकर बताएं कि रेणुकूट-अनपरा मॉडल से कैसे जीवन बदला। 

साजिश की पड़ताल : जो लोग "वामपंथी/नक्सली विचार" फैलाकर विकास रोक रहे हैं, उनकी फंडिंग और मंशा की जांच हो।
जनहित को ध्यान में रखते हुए अंत में उन्होंने कहा कि- सोनभद्र के विकास को राजनीति की भेंट न चढ़ाएं। 

आदिवासी को गुमराह करने वालों पर कार्रवाई हो, ताकि विकास का लाभ सीधे गरीब तक पहुंचे।

रिपोर्ट- श्रीराम शुक्ला.. सोनभद्र
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