•   Thursday, 09 Jul, 2026
Open gambling worth lakhs of rupees in Paan Dariba area of ​​Chetganj police station area of ​​Varan police station just a few steps away yet open gambling.

वाराणसी थाना चेतगंज में कब बन्द होगा किशन विश्वकर्मा उर्फ महाराज के जुआ का अड्डा

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  Varanasi ki aawaz

वाराणसी थाना चेतगंज क्षेत्र के पान दरीबा क्षेत्र में खुलेआम लाखों रुपए जुए का खेल मात्र 200 कदम दूरी पर एसीपी ऑफिस, कुछ ही कदम थाना फिर भी खुलेआम जुआ..

कुछ समय पूर्व भी समाजसेवी शुभम सेठ गोलू ने लिखित शिकायत के रूप में शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उसने कहा था उसके शिकायत बाद जुआ माफिया किशन विश्वकर्मा उर्फ महाराज द्वारा मारपीट भी किया गया था..

लेकिन वाराणसी पुलिस प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार से कार्यवाही न होना अपने आप मे प्रश्न चिन्ह है।

वाराणसी वसूली तंत्र की जकड़न में पूरा पुलिस महकमा फेल

जुआ के कारोबार में पूरा जकड़ा वाराणसी पुलिस तंत्र


वाराणसी:- जिसे धर्म आध्यत्म और संस्कृति की नगरी कहा जाता है, आज एक अलग ही कारण से चर्चा में है। 

स्थनीय लोगों की नजर में यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र अब जुआ, वेश्यावृत्ति वाले शहर के नाम से जाना जाने लगा है

स्थानीय लोगों का आरोप हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर थानों तक का तंत्र “वसूली” की संस्कृति में डूबा नजर आ रहा है है। 

सवाल यह उठता है कि क्या कानून का डंडा अब व्यवस्था बनाए रखने के लिए है या वसूली जुआ खेलवाने के लिए ?

शहर के व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों के बीच यह चर्चा आम है कि बिना “पुलिसिया सेटिंग” के कोई इतना बड़ा जुए का सिंडिकेट नही चला सकता

गिरफ्तारी, दबिश, जांच—हर प्रक्रिया में नियमों से ज्यादा “अत्यधिक रकम” की चर्चा होती है, जो दे देता है, वह कही भी कुछ भी अनैतिक कार्य कर सकता है

कमिश्नर कार्यालय से लेकर थाने स्तर तक जवाबदेही तय करने की जरूरत है वैसे जनता भी जनता नजर में कानून व्यवस्था पूरी तरह से फेल हैं। 

यदि अधीनस्थ अधिकारी खुलेआम वसूली में मस्त हैं, तो क्या उच्च अधिकारी अनजान हैं? 
या फिर यह सब मौन स्वीकृति से चल रहा है? 
यह वही शहर है जहां कानून व्यवस्था की मिसाल दी जाती थी, लेकिन अब व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे अधिक प्रभावित छोटे कारोबारी हैं। जो प्रतिदिन जुए के खेल के शिकार हो रहे है.उनकी घर गृहस्थी चौपट हो रही है

आम-जनमानस में डर का माहौल ऐसा कि शिकायत करने वाला खुद ही निशाने पर पुलिसिया आपराधिक साठगांठ के कारण आ जाता है।

लोकतंत्र में प्रशासन जनता का सेवक होता है, मालिक नहीं 

अगर पुलिसिया वर्दी व डंडा केवल डराने और पैसा वसूलने का प्रतीक बन जाए, तो यह न केवल कानून की आत्मा के खिलाफ है, बल्कि  वर्तमान शासन की साख पर भी सीधा आघात है !

जरूरत है कि इन जुआ कारोबारियों पर सीधी कार्यवाही हो खानापूर्ति करने वाला कार्य न हो। 

एक तरफ पुलिस कमिश्नर वाराणसी की छवि सुधारने में दिन रात एक कर रहे हैं वही उनके अधीनस्थ उनकी छवि को धूमिल करने का कार्य कर रहे हैं

वाराणसी में पुलिस वसूली का संगठित तंत्र काम कर रहा है। अगर हां, तो जिम्मेदारी तय हो और सख्त कार्रवाई हो।

क्योंकि वाराणसी शहर पूछ रहा है—

कानून व्यवस्था बिकेगा या न्याय व्यवस्था भी जिंदा रहेगा?

स्थानीय सूत्र के अनुसार पुलिस वालों का महीने वाला वसूली की सेटिंग है जिसकी जानकारी सभी अधिकारियों को है और ऊपर तक भी पहुंचता है ! 
शहर में बडी चर्चा है की लाखों का महीना और बड़े साहेब तक पहुंचाने का है माध्यम खुलकर हो रही है दलाली है लेकिन सवाल उठता है यह बड़े साहब है कौन!

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे चेतगंज थाने के सौ कदम के दूरी जुए का इतना बड़ा खेल कैसे हो रहा है.. कितना पैसा थानेदार व स्थानीय चौकी तक पहुंच रहा है

खुले में कानून का मखौल क्यों पीछे सिर्फ वसूली तंत्र ही जिम्मेदार है ! 

वही स्थनीय लोगो का कहना है वाराणसी एसओजी उच्च अधिकारियों का आदेश मिलते ही सिर्फ कार्यवाही के नाम सिर्फ खानापूर्ति करती है..
आम जनता ने कहा कि अगर स्प्ष्ट तौर पर कहा जाए तो एसओजी वाराणसी में फेल हो चुकी हैं

रिपोर्ट- युवराज जायसवाल.. वाराणसी
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