सोनार महा समागम में खुलकर हुई राजनीतिक भागीदारी पर चर्चा, समाज ने दिखाई अपनी ताकत, साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठी
वाराणसी में सोनार समाज का ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन, महा समागम में गरजी एकता की हुंकार
काशी के चौकाघाट से सोनार समाज ने भरा राजनीतिक हिस्सेदारी का हुंकार - लिए गए अति महत्वपूर्ण निर्णय
35 जिलों के प्रतिनिधियों सहित हजारों की संख्या में सोनारों की मौजूदगी में एकता और अधिकार बना मुख्य एजेंडा
सोनार महा समागम में खुलकर हुई राजनीतिक भागीदारी पर चर्चा, समाज ने दिखाई अपनी ताकत, प्रदेश में की गई स्वर्ण कला बोर्ड की मांग
सोनार समाज की एकता और राजनीतिक चेतना का महा संगम बना वाराणसी, हजारों स्वर्णकार बंधु हुए शामिल
वाराणसी:- काशी की धरती पर रविवार को इतिहास रचा गया। जब धर्म, संस्कृति और परंपरा की नगरी में हजारों सोनार एक मंच पर एकत्र हुए तो लगा जैसे पूरा काशी सोनमयी हो गया हो। चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में आयोजित सोनार महा समागम में सोनार समाज की एकजुटता का ऐसा विराट प्रदर्शन देखने को मिला, जिसकी कल्पना पहले किसी ने नहीं की थी। सुबह 11 बजे से शुरू हुआ यह महासमागम देर शाम तक अनवरत चलता रहा।
महा समागम में 35 जिलों लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, आगरा, झांसी सहित मध्य प्रदेश और बिहार के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
हजारों की संख्या में काशी के सोनार बंधु, माताएं-बहनें, युवा और बुजुर्ग मौजूद रहे। आयोजन में समाज की एकता, सम्मान, अधिकार, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी मुख्य एजेंडा रहा।
काशी के चौकाघाट से सोनार समाज ने भरा राजनीतिक हिस्सेदारी का हुंकार - लिए गए अति महत्वपूर्ण निर्णय
यह महासमागम सिर्फ भीड़ जुटाने का आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति तय करने का मंच बन गया।
मंच से आयोजक स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान के राष्ट्रीय चेयरमैन रवि सर्राफ ने कहा कि उनके साथ टीम ने लगभग 35 जिलों का दौरा कर समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
जिलाध्यक्ष किशोर सेठ ने बताया कि काशी को 30 सेक्टर में बांटकर पिछले 4 महीने से घर-घर जनसंपर्क किया गया था।
महासमागम में सोनार समाज की राजनीतिक भागीदारी और उचित प्रतिनिधित्व पर खुलकर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने दो टूक कहा कि समाज की सामाजिक और आर्थिक मजबूती के साथ राजनीतिक भागीदारी भी आवश्यक है। अब तक हम सभी दलों को वोट देते आए हैं, लेकिन जब टिकट और हिस्सेदारी की बात आती है तो हमें नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह अब नहीं चलेगा।
इस पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि -
1. आगामी चुनावों में समाज अपनी जनसंख्या के अनुपात में टिकटों की मांग करेगा।
2. हर विधानसभा में सोनार समाज की एक कोर कमेटी बनाई जाएगी जो समाज के मुद्दों को राजनीतिक दलों के समक्ष मजबूती से रखेगी।
3. सरकार को अपनी ताकत दिखाने के लिए एक बड़ा ज्ञापन भेजा जाएगा।
35 जिलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ सोनार महा समागम, एकता और अधिकार बना मुख्य एजेंडा
महासमागम में मध्य प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी ‘स्वर्ण कला बोर्ड’ के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि सोनार समाज केवल एक व्यवसायी समाज नहीं है, बल्कि यह एक प्राचीन कला का वाहक है। हमारे हाथों की कारीगरी विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण यह कला लुप्त होने के कगार पर है।
प्रतिनिधियों का कहना था कि सोनार कारीगरों, व्यवसायियों और पारंपरिक स्वर्ण कला से जुड़े लोगों के हितों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष बोर्ड की आवश्यकता है। इस बोर्ड के माध्यम से कारीगरों को सब्सिडी, प्रशिक्षण, पेंशन और उनके बच्चों को शिक्षा में सहायता मिल सकेगी। एकता और अधिकार इस पूरे समागम का मुख्य एजेंडा रहा और सभी ने एक स्वर में बोर्ड के गठन की मांग का समर्थन किया।
सोनार महा समागम में खुलकर हुई राजनीतिक भागीदारी पर चर्चा, समाज ने दिखाई अपनी ताकत, साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठी
समागम का सबसे भावुक और ज्वलंत मुद्दा रहा - सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा। बीते कुछ महीनों में लूट, चोरी, डकैती और दिनदहाड़े हत्याओं की घटनाओं ने पूरे समाज को दहला दिया है। वक्ताओं ने कहा कि हम मेहनत से सोने के जेवर को बनाते हैं, लेकिन आज हमें ही असुरक्षित माहौल में जीना पड़ रहा है।
इस पर मांग की गई कि लूट, चोरी, डकैती सहित आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जाए, व्यापारियों को सुरक्षित वातावरण दिया जाए। इसके साथ ही बीएनएस की धारा 317 (पूर्व आईपीसी 411/412) से जुड़े मामलों में सर्राफा कारोबारियों के सामने आने वाली परेशानियों पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इस कानून की आड़ में ईमानदार व्यापारियों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए और बिना ठोस जांच के कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इन समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक कानूनी पहल पर भी सहमति बनी।
साथ ही पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। प्रतिनिधियों ने कहा कि पारंपरिक सर्राफा कारोबार और गिरवी व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए एक स्पष्ट और सुरक्षित लाइसेंस व्यवस्था हो, जिससे वे अपने व्यवसाय को नियमानुसार संचालित कर सकें।
सोनार समाज की एकता और राजनीतिक चेतना का महा संगम बना वाराणसी, हजारों सोनार बंधु हुए शामिल
महासमागम के अंतिम सत्र में समाज के भीतर आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकता, संगठन और सामूहिक हित को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया।
पूर्वांचल अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह सेठ तथा महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता सर्राफ ने कहा कि युवाओं, महिलाओं, कारीगरों और व्यापारियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हमारी पहली प्राथमिकता है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया।
“गर्व से कहो हम सोनार हैं” के उद्घोष के साथ काशी से संगठित आवाज का संदेश पूरे प्रदेश में गया। सभी ने हाथ उठाकर शपथ ली कि वे समाज की एकता के लिए तन-मन-धन से कार्य करेंगे।
महासमागम में उठी प्रमुख मांगें -
1. उत्तर प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड का गठन।
2. सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा और आपराधिक घटनाओं पर रोक।
3. पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था की बहाली।
4. बीएनएस धारा 317 से जुड़ी समस्याओं का समाधान।
5. जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाराजा अजमीढ़ जी, महाराज अंबरीष जी और संत नरहरी दास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर पुष्प अर्पित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता कृष्ण नारायण सोनी, स्वागत भाषण व संचालन रवि सर्राफ, प्रस्तावना किशोर सेठ ने रखी। धन्यवाद ज्ञापन अरूण सोनी ने दिया।
इस दौरान मुख्य रूप से सरिता सर्राफ, राघवेंद्र सिंह चौहान कानपुर, ईश्वर दयाल सिंह सेठ मोहम्मदाबाद गोहना, गिरीश वर्मा मुरादाबाद, आकाश वर्मा बदायूं, विजय जी बलिया, वशिष्ठ नारायण सोनी रसड़ा, राष्ट्रीय अध्यक्ष शारदा शंकर सिंह झांसी, समरजीत सिंह मिर्जापुर, राकेश वर्मा भदोही, मनीष जी राजेश जी लखनऊ, संजय वर्मा प्रयागराज, नन्हेंलाल वर्मा विनीत जी जौनपुर, अरविंद जी खलीलाबाद, रामनिवास जी गोरखपुर, पंकज जी देवरिया, ओम प्रकाश सेठ सैदपुर, संगीता जी मगहर, पंकज जी बहराइच, कुंदन जी बस्ती,
सहित हजारों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
काशी की कार्य करने वाली टीम
कृष्ण कुमार सेठ बच्चू जी, रवि सर्राफ, कमल कुमार सिंह, विष्णु दयाल, श्याम सुंदर सिंह, किशोर सेठ, किशन सेठ, दयाशंकर सेठ अरुण सोनी, सतीश कुमार सिंह, अनिल चंचल, अरुण सोनी, रौनी वर्मा, ईश्वर दयाल सिंह सेठ, राजेश सेठ, मोहित सोनी, ईश्वर चंद्र वर्मा, बेबी सेठ, सुनीति सिंह, राजू वर्मा, संतोष सेठ, घनश्याम सेठ बच्चा, जनार्दन वर्मा, सुशील सेठ, श्याम जी सेठ, अनिल सेठ, मनोज स्वर्णकार सहित सैंकड़ों लोग।
राजेश सेठ (पत्रकार)
मीडिया संयोजक, स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान, वाराणसी
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