•   Tuesday, 10 Feb, 2026
The modern animal birth control centre will operate for 15 years with an investment of Rs 50 crore.

50 करोड़ रुपये के निवेश से 15 वर्षों तक संचालित होगा आधुनिक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और फाउंडेशन की प्रेसिडेंट रितु झिंगन ने किए हस्ताक्षर

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  Varanasi ki aawaz

शहर को रेबीज मुक्त बनाने के लिए नगर निगम व वेदांता समूह के बीच हुआ एमओयू

अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के टाको प्रोजेक्ट के तहत ऐढ़े स्थित एबीसी सेंटर का होगा कायाकल्प
50 करोड़ रुपये के निवेश से 15 वर्षों तक संचालित होगा आधुनिक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और फाउंडेशन की प्रेसिडेंट रितु झिंगन ने किए हस्ताक्षर
​वाराणसी :- काशी अब पशु कल्याण और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में भी देश के लिए मॉडल बनेगी। 
इस संबंध में नगर निगम व  वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के बीच सोमवार को एक ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) हुआ। 
इसके तहत ऐढ़े स्थित नगर निगम के पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्र को अत्याधुनिक बनाया जाएगा। 
वेदांता की प्रमुख पशु कल्याण पहल टाको के माध्यम से अगले 15 वर्षों तक इस केंद्र का संचालन और प्रबंधन किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए शुरुआती दौर में फाउंडेशन सीएसआर से 50 करोड़ रुपये निवेश करेगी, ताकि इस केंद्र में एनीमल बर्थ कंट्रोल रूल्स-2023 और भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण का कार्य वैज्ञानिक तरीके से हो सके । 
एमओयू पर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और फाउंडेशन की प्रेसिडेंट रितु झिंगन ने हस्ताक्षर किए।
इस मौके पर वेदांता लिमिटेड की गैर-कार्यकारी निदेशक और टाको की एंकर प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने कहा कि हमारा उद्देश्य वाराणसी में एक ऐसा मानवीय मॉडल विकसित करना है, जिससे पशुओं और समाज के बीच बेहतर तालमेल बना रहे। वहीं, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इस साझेदारी से शहर में आवारा पशुओं की आबादी पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। 
इस केंद्र के माध्यम से बनारस को पूरी तरह से रेबीज मुक्त और एनीमल सेंसिटिव शहर बनाने का लक्ष्य रखा है। 
फाउंडेशन यहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, वेटरनरी डॉक्टर्स की टीम और परिचालन संसाधनों की जिम्मेदारी उठाएगा, जिससे बनारस को शहरी पशु कल्याण के मामले में भारत के अग्रणी शहरों की सूची में शामिल हो जाएगा।

यह समझौता पशु कल्याण तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। 
समझौते का मुख्य उद्देश्य बनारस में व्यवस्थित व वैज्ञानिक तरीके से एबीसी (पशु जन्म नियंत्रण) संचालन तथा पशुओं की आबादी का मानवीय प्रबंधन करना है। 
इससे न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि काशी को एक पशु-संवेदनशील मॉडल शहर के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
हिमांशु नागपाल, नगर आयुक्त

रिपोर्ट- युवराज जायसवाल.. वाराणसी
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