वाराणसी उपाधि पाकर प्रफुल्लित हुए मनोवैज्ञानिक उपाधि समाज सेवा के लिए प्रेरणा प्रदान करता है प्रो हरे राम


वाराणसी उपाधि पाकर प्रफुल्लित हुए मनोवैज्ञानिक उपाधि समाज सेवा के लिए प्रेरणा प्रदान करता है प्रो हरे राम
हमारे वेदों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण, बचाव तथा मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के उपाय पर विस्तार से चर्चा किया गया है। न्याय दर्शन में भी मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को दर्शाया गया है। उपाधि प्राप्त करने वाले मनोवैज्ञानिक को प्रोफेशन के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र सेवा के दायित्व का भी निर्वहन करना चाहिए यह उद्गार नई सुबह मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार विज्ञान संस्थान, वाराणसी द्वारा भारतीय पुनर्वास परिषद, नई दिल्ली द्वारा अनुमोदित एम फिल (नैदानिक मनोविज्ञान) तथा पीजीडीआरपी कोर्स के विद्यार्थियों के उपाधि वितरण कार्यक्रम में डॉ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरे राम त्रिपाठी ने व्यक्त किया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ एस के श्रीवास्तव पूर्व शोध अधिकारी चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने की अपार संभावनाएं हैं। कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि श्री जगजीतन जी महाराज सचिव श्री धर्म संघ शिक्षण मंडल संस्थान ने कहा कि सनातन धर्म अध्यात्म मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने का साधन था जो आज भी प्रासंगिक है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ रश्मि सिंह विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम दूसरों की सेवा करते हैं तो उससे जो संतोष प्राप्त होता है वह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए संरक्षण का काम करता है। सार्थक संस्था की निदेशिका का डॉ मधुश्री पांडेय ने कहा कि आज के समय में युवा वर्ग को मनोवैज्ञानिक परामर्श की नितांत आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत गीता, अंगवस्त्रम एवं संस्था का स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से नहीं सुबह संस्था के उपनिदेशक अनुराग तिवारी, वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ मनोज तिवारी, सुनीता तिवारी, डॉ अमित तिवारी, रवि शंकर यादव व राधिका उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन मनोवैज्ञानिक अर्पिता मिश्रा ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ अजय तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ मनोज तिवारी ने किया।