•   Saturday, 05 Apr, 2025
Accused acquitted in kidnapping and raping Varanasi minor

वाराणसी नाबालिक का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपित दोषमुक्त

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  Varanasi ki aawaz

वाराणसी नाबालिक का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपित दोषमुक्त

वाराणसी:-नाबालिक किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने व उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपित को राहत मिल गई। विशेष न्यायाधीश (पाॅक्सो एक्ट) अनुतोष कुमार शर्मा की अदालत ने ककरइत थाना धीना, चन्दौली निवासी आरोपित हवलदार उर्फ सूबेदार को आरोप सिध्द न होने पर संदेह का लाभ देतें हुए बरी कर दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता फारूक हसन, अनिल गुप्ता और अविनाश गुप्ता ने पक्ष रखा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार  सुजाबाद थाना रामनगर निवासी वादी ने 9 मई 2017 को रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि वह 7 मई 2017 को दिन में मछली मारने के लिए गंगा जी गया था। जब घर आया तो देखा कि उसकी 15 वर्षिय पुत्री में नहीं है, तब आसपास रिश्तेदारों में भी पता लगाया लेकिन कही पता नहीं चला तो उसे आशंका हुआ कि उसके साढू का लड़का हवलदार उर्फ सूबेदार जो ग्राम ककरइत थाना धीना चन्दौली का रहने वाला है और सुजाबाद थाना रामनगर निवासी गिलवा व चन्दन उर्फ लड्डू प्रार्थी को धमकियां दिये थे कि वह अपनी पुत्री की शादी कैसे कर लेगा, देखे लेगे। उसकी लड़की को भगाने के लिए कई बार ये लोग धमकियां दे चुके थे कि वल अपनी लड़की की शादी कैसे कर लेगा, इसी के चलते ये लोग उसकी लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले गये हैं। पता चला कि उसकी लड़की को हवलदार, गिलवा व चन्दन उर्फ लड्डू अपने साथ ले जा रहे थे। वह अपनी लड़की की काफी खोजबीन किया लेकिन कुछ पता नहीं चला।

अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उसके पिताजी उसकी शादी काफी बड़े लड़के के साथ कर रहे थे जो उसे पसंद नहीं था। वह उस लड़के से शादी करना नहीं चाहती थी। वह हवलदार उर्फ सूबेदार से प्यार करती थी वह भी उससे प्यार करता था। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन उसके पिताजी को रिश्ता पसंद नहीं था। इसलिए 7 मार्च 2017 को बिना बताये वह अपने घर से चली गई थी। वह रामनगर से मुगलसराय गई फिर वहां से लखनऊ चली गई और वहीं दोनों ने शादी कर ली और दो महीना रहें। लड़की की अपने पापा से मिलने की इच्छा हुई तो हवलदार उर्फ सुबेदार उसे लेकर रामनगर आया। जब वह लोग रामनगर पापा के पास आए तो पता चला कि पापा ने उसके खिलाफ मुकदमा लिखवा दिया है। उसी दिन महिला पुलिस और पुरुष पुलिस आये और दोनों को थाने ले गए। अपने बयान में पीड़िता ने कहा कि हवलदार मुझे बिना पापा की अनुमति के ले गया था और मेरे साथ शारीरिक संबंध जबरन नहीं बनाये। पीडिता के द्वारा अपने साक्ष्य बतौर पी डब्लू01 कथन किये गये हैं कि मुझे हवलदार उर्फ सूबेदार ने बहला-फुसलाकर भगाया नहीं था। मैं अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी। मुझे हवलदार उर्फ सूबेदार ने कभी मारने की धमकी नहीं दिया गया था। मुझे हवलदार उर्फ सुबेदार के परिवारवालों ने ना तो कभी धमकी दिया था, ना तो कभी मुझे प्रताड़ित किया था। मेरे साथ कोई जबर्दस्ती गलत काम हवलदार उर्फ सूबेदार ने नहीं किया था। जो भी मेरे साथ संबंध बना मेरी मर्जी से बना। मैं अपने पति हवलदार उर्फ सूबेदार के साथ बतौर पति पत्नी एक साथ रह रहे हैं। हम दोनों के संबंध से एक बच्चा भी पैदा हुआ है, जिसका नाम आदित्य है जो 1 वर्ष का है। 

प्रस्तुत प्रकरण में स्वयं पीड़िता के द्वारा कहा गया है कि घटना के समय उसकी आयु 20 वर्ष थी, उसकी पैदाइश वर्ष 1997 की है और उसके पिता ने नाम लिखाते वक्त उम्र कम लिखवाई थी। परीक्षित साक्षी डब्लू - 3 प्रधानाध्यापक के द्वारा भी अपने बयान में कथन किया गया है कि पीड़िता का प्रवेश वर्ष सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग पर गृह शिक्षा के आधार पर किया गया था तथा माता-पिता जो आयु बच्चों की बताते हैं वही आयु अंकित कर दी जाती है। हम लोग बच्चों का जवानी टेस्ट लेते हैं। उसका उसी कक्षा में प्रवेश कर लिया जाता है। लड़की के मां-बाप ने कक्षा 6 में एडमिशन कराते समय किसी भी स्कूल की टीसी नहीं दाखिल की गई थी। कथन है कि पीड़िता वर्ष 1997 में पैदा हुई जिससे कि वह घटना की 7 मई 2017 को लगभग 20 वर्ष की आयु की बैठती है। चिकित्सालय प्रशिक्षण में भी पीड़िता की आयु घटना के समय 18 से 19 वर्ष के मध्य आई है जो आयु के संबंध में पीड़िता के पिता के द्वारा न्यायालय में बताया गये जन्मतिथि जन्म वर्ष 1997 के सन्निकट है। ऐसे में वह घटना के समय बालिग थी, ऐसे में आरोपित द्वारा उसे भगा ले जाना न दुष्कर्म करना संभव नहीं है। अदालत ने पत्रावली व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आरोपित को आरोप सिध्द न होने पर दोषमुक्त कर दिया।

रिपोर्ट- फरहान अहमद. संवाददाता वाराणसी
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