चित्रकूट रामनगर आखिर कब तक विद्यालय में मासूम बच्चे होते रहेंगे हादसे का शिकार कौन देगा विद्यालय में छात्रों को सुरक्षित माहौल


चित्रकूट रामनगर आखिर कब तक विद्यालय में मासूम बच्चे होते रहेंगे हादसे का शिकार कौन देगा विद्यालय में छात्रों को सुरक्षित माहौल अभिभावक अपने मासूम बच्चों को उनके भविष्य को संवारने के लिए सरकारी स्कूलों में मात्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए घर से तैयार कर भेजते हैं
लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से फिलहाल उनके मासूमों की जिंदगी दांव पर लगती हुई देखी जा रही है दुर्भाग्य इस बात पर भी है कि जिम्मेदार किसी हादसे से सबक लेकर बचाव के लिए कोई प्रभावी कदम उठाने की न तो जहमत उठा रहे हैं और न ही अपनी जिम्मेदारी मान रहे हैं ऐसे में जहां छात्रों में डर बना हुआ है तो वहीं अभिभावकों के मन में भी अपने मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता दिखाई दे रही है
विकास खण्ड रामनगर के अंतर्गत विद्यालयों की वर्तमान स्थितियों के बारे में बात करें तो ज्यादातर विद्यालय परिसर फिलहाल खतरे के लिहाज से प्रथमदृष्टया सुरक्षित नहीं दिख रहे हैं हैरत इस बात पर भी है कि जिम्मेदार फिलहाल इस अनजान खतरे से अनभिज्ञ बने हुए हैं यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कदाचित मासूमों को अपना भविष्य सँवरने के पूर्व से ही अनचाहे खतरे से जूझना पड़ सकता है
बच्चों के भविष्य को लेकर फिलहाल हर अभिभावकों के मन में जहां संसय बना हुआ है वहीं दूसरी ओर इस अनचाहे खतरे की लगातार सूचना मासिक सूचना पत्र में लिखकर शिक्षा विभाग को भेजने वाले शिक्षकों को भी असमंजस में लाकर खड़ा कर दिया है शिक्षकों को मलाल इस बात पर भी है कि जब विभागीय रूप से सूचना दी जा रही है तो उसमें ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है
विद्यालय में संभावित खतरों की बात करें तो अधिकांश विद्यालयों से विजली की हाईटेंशन लाइन जा रही है तो किसी विद्यालय में जर्जर भवन के नीचे बैठकर मासूम बच्चे अपना भविष्य सँवार रहे हैं वहीं कुछ विद्यालयों में पुराने पेड़ की ड़ालें ऐसी स्थिति में दिख रही हैं कि कभी भी पूरा पेड़ गिर सकता है ऐसी तस्वीरों को देखने पर बरबस ही किसी अनहोनी की आहट सुनाई दे जाती है लेकिन जिम्मेदार इस आहट को महसूस करते हुए भी इससे अनजान बने हुए हैं
अभी हाल ही में विकास खण्ड रामनगर के ग्राम पंचायत बाँधी के एक विद्यालय में पेड़ की डाल योगा कर रहे बच्चों के ऊपर टूटकर गिर गई थी गनीमत रही कि इस हादसे में लगभग सात बच्चे ही सिर्फ चुटहिल ही हुए अन्यथा बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती थी वहीं कुछ दिनों पूर्व नादिन कुर्मियान के विद्यालय में भी एक जर्जर छत का प्लास्टर गिर गया था लेकिन उस वक्त बच्चे वहाँ नहीं थे अन्यथा यहां पर भी किसी दुर्घटना की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता था
हैरानी की बात यह भी है कि सभी विद्यालयों से हर माह मासिक डाक के रूप में विद्यालय की व्यवस्था एवं आवश्यकता तथा समस्याओं को जानकारी के रूप में लिखित रूप से मांगी जाती है जिसमें अधिकांश नहीं पूरे शिक्षकों द्वारा सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाती है लेकिन उक्त डाक द्वारा भेजी गई सूचना पर कोई प्रभावी कार्यवाही होती हुई कभी दिखाई नहीं दी है ऐसे में मासिक डाक लेने की व्यवस्था में सवाल खड़े होना स्वाभाविक ही है
हर मासिक सूचना के माध्यम से ऐसे हादसे की सम्भावना की ओर ध्यान दिलाने के लिए मासिक सूचना शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित है लेकिन विभागीय जिम्मेदार इस महत्वपूर्ण सूचना पर कदाचित बेपरवाह बने हुए हैं
विकास खण्ड रामनगर के कम्पोजिट विद्यालय पियरियामाफी में सन 1972 में निर्मित दो कक्ष जर्जर हालत में पहुंच गए हैं जिसे बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से इस भवन का ध्वस्तीकरण नितांत आवश्यक है इसके सन्दर्भ में विद्यालय के प्रधानाध्यापक शंकरदयाल शुक्ला लगातार मासिक डाक द्वारा निर्देश जारी करने का अनुरोध किया लेकिन विभाग द्वारा अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आ सकी है इसी तरह कम्पोजिट विद्यालय भदेवरा में भी एक भवन तो क्षतिग्रस्त हो गया है जिसका ध्वस्तीकरण आवश्यक है इस विद्यालय में जिस कक्ष के अंदर मासूम बच्चे अपना भविष्य सँवार रहे हैं उस कक्ष की दीवार एवं छत में दरार पड़ गई है यद्यपि विद्यालय में ग्राम पंचायत द्वारा कायाकल्प कराया गया है बावजूद इसके बारिश में छत से पानी आज भी टपकता है इसी तरह कम्पोजिट विद्यालय बरुआ एवं प्राथमिक विद्यालय पटियन पुरवा में विद्यालय परिसर से विजली के पोल एवं ट्रांसफार्मर लगा हुआ है जिसको विद्यालय परिसर से हटवाने की आवश्यकता है लेकिन शिक्षकों द्वारा मासिक डाक से सूचना देने के बावजूद भी अब तक विद्यालय को इस समस्या से निजात नहीं मिली है
जबकि स्वयम खण्ड शिक्षाधिकारी रामनगर अतुल दत्त तिवारी जो 3 जुलाई को रामनगर में पद भार ग्रहण करते ही वे लगभग सभी विद्यालयों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं लेकिन धरातल पर जाने वाले खण्ड शिक्षा अधिकारी अतुल दत्त तिवारी अपनी नजरों से विद्यालयों की इन दशा और दुर्दशा कितनी देखी और कितने विद्यालयों की समस्याओं का निस्तारण कराया यह फिलहाल शिक्षकों के लिए पहेली बना हुआ है जबकि तमाम विद्यालयों के शिक्षक मासिक डाक द्वारा अपने विद्यालय के जर्जर कमरों का ध्वस्तीकरण कराए जाने एवं कुछ विद्यालयों से हाईटेंशन लाइन को हटवाए जाने की मांग लगातार करते रहे हैं लेकिन उनके द्वारा भेजी गई मासिक डाक की सूचना पर कोई निर्देश आज तक नहीं आ सका है ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्यालय में भविष्य सँवार रहे मासूमों को लेकर शिक्षा विभाग कितना जवाबदेह है इस सम्बंध में जब अतुल दत्त तिवारी खण्ड शिक्षा अधिकारी रामनगर से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
