मिर्जापुर अहरौरा थाना क्षेत्र के पहाडी इलाको मे पेयजल की भारी किल्लत पानी के लिए डब्बा गैलन बाल्टी लेकर दर दर फटक रहे है ग्रामीण


मिर्जापुर अहरौरा थाना क्षेत्र के पहाडी इलाको मे पेयजल की भारी किल्लत पानी के लिए डब्बा गैलन बाल्टी लेकर दर दर फटक रहे है ग्रामीण
सरकर के तरफ से लाखो रुपए लगता है कागजो पर भारी-भरकम बजट खर्च कर ग्रामीण अंचलों में पर्याप्त पेयजल आपूर्ति का दावा सरकार की तरफ से किये जाने के वावजूद भी थाना क्षेत्र के दुर्गा जी पहाड़ी श्रीरामपुर पहाड़ी छातों हिनौता रामपुर ढाबही बैरमपुर जंगल महाल खुटाहा बेचूबीर बनइ मिलिया खुटहा के क्षेत्रों में केवल हैंडपंप लगे खराब पड़े हैं हर साल रिबोर के नाम पर हर ग्राम पंचायतों में हैंडपंप का रीबोर कागजो कराया जाता है किया जाता है यह गर्मी मार्च महीने से पढ़ना शुरू है मार्च के महीने से पहाड़ी इलाकों का पानी का लेयर नीचे खिसक जाता है हैंडपंपों में ग्राम पंचायत के द्वारा पंचायत ग्राम प्रधान सेक्रेटरी द्वारा जो लगाए गए हैं वह पाइपों की बहुत कम संख्या है पाइप केवल कोटा पूर्ति के नाम से सेक्रेटरी और ग्राम प्रधान और वीडियो भी मिलीभगत से केवल कागजों पर कार्य पूरा कर दिए जाते हैं जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश दिखता है पशु पक्षियों को पानी पिलाने के लिए पीने के लिए इस 44 डिग्री सेल्सियस के तापमान में ग्रामीण पहाड़ी इलाके में मनाई और खप्पर के मकानों के सहारे अपना ठेला में पानी भरकर दूरदराज के कों से लाइन लगाकर 2किलोमीटर दूर से ले आते हैं पानी पीने के लिए और थाना क्षेत्र के सारा द जंगल महाल मलेरिया क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत ताल की पू विकास खंड के जंगल व सुदूर पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोग सुबह होते ही पीने के लिए पानी का जुगाड़ करने के लिए दूर दूर भटकना पड़ रहा है।तपती गर्मी में गला तर करने के लिए ग्रामीणों का पूरा दिन पानी का जुगाड़ करने में बीत रहा हैं। तेज धूप व कड़ाके की तपन के कारण जलस्तर नीचे खिसकने से गावो में लगे अधिकतर हैंडपम्पो से पानी के बजाय हवा निकल रही है।जिससे अपनी प्यास बुझाने के फिराक में लगे ग्रामीण समझ नही पा रहे हैं कि आखिर पेयजल संकट से छुटकारा मिलेगा भी या नही पुरैनिया पुरव दरोगा,शांति ने बताया कि 50 से 60 घरों वाली वस्ती में चार हैंडपम्प लगाए गए हैं।जिसमे सभी खराब हो चुके है।जिससे बस्ती के लोगो को लगभग 500 मीटर दूर से कुए से पानी भरना पड़ा रहा है।वही गांव के पंचायत भवन के पास रिबोर कराने के लिए नवंबर माह में ही एक लाख सत्ताईस हजार रुपये बिना बोरिंग कराये ही निकाल लिए गए थे।ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों से शिकायत किये जाने पर किसी तरह मई महीने में बोरिंग कराया गया।जिससे साफ तौर जाहिर हो रहा है पेयजल समस्या को लेकर कर्मचारी गम्भीर नही है और अपना जेब भरने में लगे हुए हैं।
वही जंगलों व पहाड़ो से सटे सरसो सेमरी ग्राम पंचायत के कोटिया पुरवा निवासी जय सिंह, रज्जन, पिन्टू व रामविलास ने बताया कि 70 से 80 घरों वाली इस बस्ती में पेयजल आपूर्ति के लिए तीन हैंडपम्प लगाए गए हैं।जिसमे केवल एक हैंडपम्प से ही पानी निकल रहा है।जिससे ग्रामीणों को पेयजल के जुगाड़ के लिए सौ से पांच सौ मीटर दूर से किसानों बोरिंग से डिब्बो, गगरी व बाल्टी में पानी भरकर साइकिल,ठेला व सिर पर लादकर लाना पड़ रहा है।वही बिजली कटने के बाद पानी नही मिल पाता।जिससे ग्रामीण रात से ही बोरिंग पर पानी भरने लिए पहुच जाते हैं।पेयजल संकट से जूझ रहे गरीब तपके के लोगो का कहना है कि पेट की भूख मिटाने के लिए दिनभर कड़ी मेहनत व खटनी करनी पड़ती है और घर पहुचने के बाद गला तर करने के लिए पानी का जुगाड़ करना पड़ता है।जिससे आराम न मिलने पर लोग बीमार भी पड़ रहे है।हालांकि पेयजल आपूर्ति के लिए सेमरी गांव में एक टैंकर लगाया गया है।परंतु ग्रामीणों की प्यास बुझाने में टैंकर का पानी ऊट के मुह में जीरा के समान साबित हो रहा है।

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