चित्रकूट बुंदेलखंड के उन्नयन के मुद्दे को लेकर समाजसेवी गोपाल भाई ने उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र से मुलाकात की


चित्रकूट बुंदेलखंड के उन्नयन के मुद्दे को लेकर समाजसेवी गोपाल भाई ने उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र से मुलाकात की
इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए बिंदुवार पत्र भी सौंपा । जिसमें खासतौर से पेयजल समस्याओं के निराकरण के लिए सुझाव दिए गए हैं ।
बुंदेलखंड में गरीब परिवारों एवं आदिवासियों के जीवन सुधार और बेहतरीन जल प्रबंधन के लिए कई दशकों से काम कर रहे अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई ने बताया कि सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड में समुचित जल प्रबंधन के अभाव में वर्षा का जल अक्सर व्यर्थ बह जाता है। इसके चलते बुंदेलखंड प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न होकर भी विपन्न है। पूर्व में बुंदेलखंड की आवश्यकता के अनुरूप यहां योजनाएं लागू न होने, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उनका क्रियान्वयन न होने के चलते वर्तमान में व्यवस्था सुधार आवश्यक है । उन्होंने कहा कि खेत का पानी यदि खेत में ही रोका जाए तो जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके लिए प्रत्येक जनपद में वन विभाग को जल संरक्षण हेतु सघन योजनाएं शासन स्तर से प्रदान की जानी चाहिए। साथ ही प्रत्येक क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच, जल अवशोषक खंती, पत्थर गली प्लग, जलाशय, बोरी बंधान, पहाड़ के बड़े नालों में चेकडैम, बीज छिड़काव आदि के जरिए जहां वनस्पतियां, वृक्ष तैयार हो जाएंगे ,वही बंद प्राकृतिक जलस्रोत भी खुल जाएंगे। जिससे क्षेत्र में स्वतः लगने वाली आग का प्रकोप भी कम होगा और जैव विविधता संवर्धन होगा। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड तालाबों का क्षेत्र था । वर्तमान समय में बड़े पैमाने पर तालाब विलुप्त हो चुके हैं। इन्हें मुक्त कराने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने से जल संचयन का बड़ा क्षेत्र हासिल हो सकता है। इसी प्रकार जर्जर कूपों के जीर्णोद्धार एवं गहरीकरण करने से पेयजल एवं सिंचाई सुविधा बढ़ेगी। साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों को चिन्हित करते हुए अटल भूजल योजना के माध्यम से बावड़ी का निर्माण कराने से संकट से उबरने में मदद मिलेगी। बारामासी नदियों पर बने हुए 60% चेकडैम दशकों से क्षतिग्रस्त पड़े हुए हैं उद्धरण के लिए चित्रकूट जनपद के पठारी क्षेत्र मानिकपुर के लिए वरदान कही जाने वाली 12 छोटी नदियों से मिलकर बनी बरदहा नदी के ध्वस्त चैकडैमों की दुर्दशा देखी जा सकती है। ऐसे में प्रत्येक जिले की समस्त बारहमासी नदियों पर प्रत्येक ध्वस्त चेकडैम की ठीकठाक मरम्मत कराए जाने से कृषि के साथ बड़ा उपकार होगा। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा कुछ ऐसे प्रयोग पाठा क्षेत्र में किए गए हैं ,जो आज जनहित में उपयोगी साबित हो रहे हैं। मानिकपुर क्षेत्र के गोपीपुर गांव स्थित इकलौते चौहड़े का लघु बावड़ीकरण समूचे गांव की प्यास बुझा रहा है। कृषक कल्याण के मद्देनजर बुंदेलखंड में मनरेगा श्रमिकों को कृषि कार्य के रोजगार से जोड़ने पर किसानों का हित संभव है। बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी एवं श्रमिकों का कृषि कार्य से खत्म होता नाता किसानों के लिए संकट का विषय बन गया है । ऐसे में खेतिहर भी कृषि कार्य छोड़कर पलायन को मजबूर हैं। यदि कृषकों की मांग पर कम से कम 50% सब्सिडी सहित मनरेगा श्रमिकों को उपलब्ध कराएं तो कृषि कार्य आसान होगा एवं कृषकों को गांव में रोजगार की स्थिति बनेगी। जिससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा गोवंश आधारित कृषि ग्राम स्थापना करने के लिए बुंदेलखंड के जिले में एक या दो गांव को चिन्हित करते हुए मॉडल प्रस्तुत किए जाने के प्रयास होने चाहिए। बुंदेलखंड के हरा सोना के रूप में जाने जाने वाले तेंदूपत्ता के लिए बीजों की नर्सरी तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा पाठशालाओं का सुंदरीकरण किया जाना सुखद है, किंतु शिक्षा की गुणवत्ता अभी भी जस की तस है। इसके लिए कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित करा दिए जाएं तो ब्लॉक, जिला तथा राजधानी स्तर से शिक्षण कार्य की असरदार मानिटरिंग हो सकती है। मुलाकात के दौरान साथ में सहभागी शिक्षण केंद्र, लखनऊ से अशोक भाई, सृजन झांसी से आशीष एवम प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञ जनदीप भी मौजूद रहे।... विजय त्रिवेदी चित्रकूट
