•   Saturday, 05 Apr, 2025
Emergency was born out of dictatorial mentality by suppressing the voice of constitution and democra

संविधान और लोकतंत्र की आवाज़ दबाकर तानाशाही मानसिकता से उपजा था आपातकाल जसवंत सैनी

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  Varanasi ki aawaz

संविधान और लोकतंत्र की आवाज़ दबाकर तानाशाही मानसिकता से उपजा था आपातकाल जसवंत सैनी


शामली। वाराणसी की आवाज। भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के सबसे दुःखद और काला अध्याय आपातकाल की 49वी बरसी के निमित्त नगर पालिका परिषद शामली सभागार में एक संगोष्ठी एवं लोकतंत्र सेनानियो के सम्मान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार आदरणीय श्री जसवंत सैनी जी व विशिष्ट अतिथि भाजपा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष श्री मान सिंह जी रहें।
आपातकाल की 49वीं बरसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री जसवंत सैनी जी ने कहा कि आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काले अध्याय के रुप में याद किया जाता है । कांग्रेस ने लगातार 28 साल शासन करने के बाद अपनी डगमगाती सत्ता को बचाने के लिए संविधान की मर्यादा को तार तार करते हुए 1975 में 49वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था वह उनकी तानाशाही थी। उस दौरान लोकतंत्र को बचाने के लिए आवाज उठाने वाले राजनेताओं, मीडिया, स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज को दबाया गया और जेल में डालकर यातनाएं दी गई आपातकाल की 49वीं बरसी कार्यक्रम में लोकतंत्र के दिवंगत प्रहरियों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विशिष्ट अतिथि श्री मान सिंह जी ने आपतकाल के समय में अपने परिवार के लोकतन्त्र सैनानियो पर शासन के तानाशाहो द्वारा दी गई यातनाओ को संक्षेप में बताया।
भाजपा ज़िला अध्य्क्ष आदरणीय तेजेंद्र निर्वाल जी ने भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के सबसे दुःखद और काला अध्याय अपातकाल पर प्रकाश डालते हुए कहा 25 जून 1975 में आपातकाल लगाकर तभी आधी रात में ही पूरे देश को जेल में तब्दील कर दिया गया था । आम जनता के मौलिक अधिकार खत्म कर दिए गए। अगर हम आपतकाल की जड़ों की तरफ देखे तो इसके पीछे लोकतंत्र विरोधी सोच बड़ा कारण नज़र आती है। कुशासन और भ्रष्टाचार देश भर में उपजा जनांदोलन इंदिरा गांधी के लिए परेशानी का सबब था जिन घटनाकर्मो में हाई कोर्ट के आदेश ने इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द किया उसे वह स्वीकार नहीं कर पाई। लोकतंत्र में स्वीकारोक्ति का साहस होना नितांत जरूरी है आपातकाल न तो किसी अध्यादेश से आता है और न ही किसी घटना के कारण आता बल्कि इसकी जड़े तानाशाहो की मानसिकता में होती है।
इस अवसर पर चैयरमैन नगर पालिका परिषद् शामली श्री अरविन्द संगल जी द्वारा लोकतंत्र सैनानियों/प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक श्री राजेन्द्र सिंह मादलपुर जिला महामंत्री भाजपा व सहसंयोजक श्री भूपेन्द्र शर्मा जिलाउपाध्यक्ष भाजपा रहे। इस अवसर पर लोकतंत्र सैनानियो के सम्मान में लोकतंत्र सैनानी/प्रतिनिधि श्री राजेंद्र सिंह विधुर टिटौली, श्री कृष्ण बंधु नाला, श्रीमती राजबाला पत्नी स्व0 धर्मवीर शामली उदयवीर सिंह पेलखा, इस्तियाक झिंझाना, हबीब कैराना आदि को सम्मानित किया गया। 
इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष  रामजी लाल कश्यप, पूर्व जिलाध्यक्ष पवन तरार, महामंत्री  पंकज राणा, पुनीत द्विवेदी, रणधावा मलिक, मण्डल अध्यक्ष सतीश धीमान, गजेंद्र सिंह, सतवीर वर्मा, सुधीर पंवार, कुलदीप रोड, भूपेंद्र सिंह, छोटू सैनी, चकरेश राणा, अतुल मित्तल, जगदीश सिंह, राणा, सलमान अहमद, ऋषिपाल फ़ौजी, श्रीमती पूनम राणा, श्रीमती स्नेहा गर्ग, श्रीमती मंजू आर्य, पंकज कश्यप, अनुज राणा, पीयूष सैनी, निविश, छत्रपाल कश्यप, सतपाल सिंह भूरा, रोहित विश्वकर्मा, बादल गौतम, सचिन जैन, सभासद अजीत निर्वाल, अरविन्द खटीक, राजीव गोयल, प्रमोद जांगिड, आशीष गुप्ता, अनिल कुमार उपाध्याय, तोहिद, डॉ0 राजेन्द्र संगल, निशीकांत सिंघल, विनोद तोमर, रोबिन गर्ग, सभासदपति पंकज गुप्ता, संजय उपाध्याय, गुलजार मंसूरी एवं ज़िला के पदाधिकारी व भारतीय जनता पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता आदि उपस्थित रहें।

रिपोर्ट- अजीत कुमार श्रीवास्तव, शामली, सहारनपुर मण्डल
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