•   Saturday, 05 Apr, 2025
Who says that Hayat Zafar Hashmi accused of instigating the riot did not see the picture with the al

कौन कहता है दंगा भड़काने का आरोपी हयात जफर हाशमी का कद नही देखे तस्वीर कथित पत्रकारों को साथ लेकर करता था थाने चौकी की पैरवी उसके करीबी पत्रकार के साथ देखे तस्वीर

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  Varanasi ki aawaz

*कौन कहता है दंगा भड़काने का आरोपी हयात जफर हाशमी का कद नही देखे तस्वीर कथित पत्रकारों को साथ लेकर करता था थाने चौकी की पैरवी उसके करीबी पत्रकार के साथ देखे तस्वीर


कानपुर:- कानपुर को दंगे की आग में झोकने का आरोपी हयात ज़फर हाशमी एक सिंडिकेट चलाता था। आ भी जेल में बैठ कर वह इस सिंडिकेट को संचालित कर रहा है। अगर इसकी गिरफ्तारी पर नज़र डाले तो एक युट्यूब चलाने वाला कथित पत्रकार भी इसके साथ गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद चर्चा उठी थी कि हयात ज़फर हाशमी ने अपने गुर्गे पत्रकारिता में भी पाल रखा है। मगर समय के साथ ये चर्चा पर धुल जमने लगी है।
इसके बाद हयात ज़फर हाशमी के चमचो ने उसके जेल जाने के बाद उसको एक बड़ा समाजसेवक बताते हुवे उसका गुणगान करना अखबार के माध्यम से शुरू कर दिया। इस सम्बन्ध में पिछले अंक में हमने खबर भी लिखा था कि हयात ज़फर हाशमी का सबसे करीबी गुर्गा चटरू है जो पहले रिक्शा चलाता था। मगर लॉकडाउन के समय हयात ज़फर हाशमी ने अपने करीबी फुजैल के अख़बार का उसको पत्रकार बना दिया था। जिसके बाद से फुजैल और चटरु को मिर्चा लग गया और खुद का सम्बन्ध हयात ज़फर हाशमी से न होने की दुहाई देने लगे।
वैसे बताते चले कि दंगो के बाद फुजैल की तलाश में तत्कालीन थाना प्रभारी बेकनगंज ने फुजैल के कार्यालय पर छापेमारी भी किया था। मगर फुजैल फरार हो गया था और अपने साथ कुछ कथित पत्रकारों की भीड़ लेकर तत्कालीन कमिश्नर विजय सिंह मीना से मिलकर खुद को निर्दोष और बेकसूर तथा हयात ज़फर हाशमी से अपने कोई भी सम्बन्ध नही होने की दुहाई देने लगा। उसकी इस दुहाई से तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने उसकी बातो पर विश्वास कर लिया और मामला ठन्डे बस्ते में चला गया। इसके बाद से हयात ज़फर हाशमी जेल में बैठ कर अपने गुर्गो से खुद का जयकारा करवा रहा है।
एक तस्वीर हमको सोशल मीडिया से प्राप्त हुई है। यह तस्वीर एक साल पहले की बताई जाती है। तस्वीर नौबस्ता थाने के बाहर की है जिसमें हयात ज़फर हाशमी और फुजैल के साथ फुजैल का एक पत्रकार भी खड़ा है। तस्वीर साफ़ साफ़ बयान कर रही है कि हयात ज़फर हाशमी के पत्रकारों के बीच कैसी घुसपैठ थी इसके कारण आज भी वह अपने गुर्गो के माध्यम से खुद को बेकसूर कहलवाता है और खुद का जयकारा कहलवा कर अल्पसंखयक समुदाय का खुद को हीरो बताता है। तस्वीर इस बात की गवाही दे रही है कि हयात ज़फर हाश्मी किस हद दर्जे तक का शातिर है। देखना होगा कि पत्रकार का खुद पर ठप्पा लगा कर घूमते ऐसे समाज के दुश्मनों पर कानपुर कमिश्नरेट पुलिस कब कार्यवाही करती है।

रिपोर्ट- विजय त्रिवेदी. जिला संवाददाता कानपुर
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