प्रयागराज दास्ताने राम में दिखा तहज़ीब का अनूठा संगम


प्रयागराज दास्ताने राम में दिखा तहज़ीब का अनूठा संगम
प्रयागराज:;बेनहर स्कूलों एवं बफ्टा ( बेनहर स्कूल फॉर थिएट्रिकल आर्ट्स ) के संस्थापक तारिक़ खान द्वारा परिकल्पित एवं बफ्टा द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय रंगमंच उत्सव के चौथे दिन संगम नगरी मैं शुक्रवार को रामलीला के मंचन के जरिए तहज़ीब का अनूठा संगम एवं आपसी सद्भाव की मिसाल पेश की गई I दूसरी बार उर्दू राम लीला का मंचन देखने के लिए उमड़ी लीला प्रेमियों की भीड़ से बेनहर स्कूलस के ज़ाहिदा ऑडिटोरियम में खड़े होने की जगह नहीं बची I. प्रयागराज में दूसरी बार शुक्रवार की शाम को ' दास्ताने राम ' उर्दू में राम लीला के मंचन के ज़रिये गंगा यमुनी तहज़ीब का उदहारण प्रस्तुत किया गया I इस उर्दू ' राम लीला ' के लेखक प्रोफेसर दानिश इक़बाल जामिया मिलिया में पढ़ाते है I तारिक़ खान द्वारा निर्मित, मुस्ताजाब मालिक एवं क्रिएटिव डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह द्वारा निर्देशित इस संगीतमय उर्दू रामलीला में शास्त्रीय एवं लोक नृत्यों की जुगलबंदी भी बेहद ख़ास रही I भरतनाट्यम के आलावा कथक एवं छाऊ लोकनित्र्य का मिश्रण हर किसी के लिए मोहक और यादगार रहा I ‘ दास्ताने राम ’ में छाया कटपुतली का प्रयोग भी बेहद रोचक था I छाया कटपुतली को कोरेओग्रफ्य कर्नाटक के गुंडूराजु ने किया I डेढ़ घंटे की इस लीला में राम की भूमिका संदीप सिंह ने की, राम के बचपन की भूमिका अज़ल खान ने निभाई , सीता के रूप में रश्मि सिंह , लक्ष्मण के रूप में अंकित सिंह और रावण के रूप में भूपेंद्र त्यागी का अभिनय सराहा गया I. दास्ताने राम के सभी शास्त्रीय तथा कथक नृत्यों को मशहूर कोरिओग्राफर पुनिता शर्मा ने तैयार किया I इस लीला में मुस्लिम परम्पराओं के अनुसार ' राम ' की तारीफ में ' नात ', दशरथ की मृत्यु पर ' मर्सिया', ' मन्क़बत ' आदि का मेल लीला प्रेमियों को सकते में डाल गया I दास्ताने राम की प्रस्तुति समाप्त होते ही लीला प्रेमियों ने खड़े होकर तालियां बजायीं और लीला की भूरी- भूरी प्रशंशा की I
रिपोर्ट-मो. रिजवान. इलाहाबाद