•   Sunday, 06 Apr, 2025
Bhaipur feeder is based on the water of Mirzapur Baan Sagar Dam

मीरजापुर बाण सागर डैम के पानी पर आधारित है भाईपुर फीडर

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  Varanasi ki aawaz

मीरजापुर बाण सागर डैम के पानी पर आधारित है भाईपुर फीडर

जरगो कमाण्ड के किसानो का डिमांड चुनार मिर्ज़ापुर (1)- बाणसागर का पानी न्यूनतम 3 साल तक लगातार जरगो जलाशय मे लाओ, परीक्षण कराओ ?, जरगो कमाण्ड के किसानो मे विश्वास जगाओ ?, फिर पानी ले जाओ, जरगो कमाण्ड का निर्णय।*
(2)- जब पर्याप्त जल बाणसागर डैम से जरगो डैम में आ जाए, तब भाईपुर फीडर से संबंधित किसानों  को अहरौरा कमाण्ड से जरगो कमाण्ड में किया जाए सम्मिलित और फिर तब ही दिया जाए भाई फीडर को पानी
 
भविष्य की चुनौती, सुनिश्चित सिंचाई के लिए 2 पीढी 44 वर्षो से बाट जोह रहे किसानो के हितार्थ बाणसागर परियोजना की आँस छोड़ अहरौरा और जरगो कमाण्ड के सुनिश्चित सिंचाई हेतु अपने नैतिक जिम्मेदारियों का पालन कर विभाग बनाए नए वैकल्पिक व्यवस्था*

*विभाग किसानो से किसान को लड़ाने से आए बाज, वरना इसके होगे गंभीर परिणाम और सभी के जिम्मेदार होगे विभागीय अधिकारी
    

बाणसागर डैम का शिलान्यास 44 वर्ष पूर्व 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई एवम् म प्र के मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा, उ प्र के मुख्यमंत्री राम नरेश यादव व बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की उपस्थिति में इस आशय से हुआ कि उक्त बाण सागर बाध का म प्र 50% तथा उ प्र 25% व विहार 25% पानी करेगे उपयोग और इसी के अनुसार धन लगायेगे इसी समझौते के अनुसार तीनों प्रदेश में धन लगाया और विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ बाण भट्ट की जन्म स्थली देवलोन जिला शहडोल म प्र मे सोन नदी पर बाणसागर डैम भी बन गया।
     परन्तु 44 वर्ष मे दो पीढी गुजर गयी और जरगो डैम मे बाणसागर का पानी नही आया इसकी आँस मे तब के लिए अब जो विभिन्न क्षमता के जरगो डैम से (1)- नुआव माईनर 32 क्यूसेक, (2)- भाईपुर फीडर 90 क्यूसेक बना दिया गया है और (3)- पटिहटा माईनर रामपुर ढबई पंप कैनाल 20 क्यूसेक × 3 पम्प = 60 क्यूसेक अर्थात कुल 182 क्यूसेक का अतिरिक्त भार बाणसागर के सहारे जरगो डैम पर कमाण्ड बढा दिया गया और किसानों के बीच झगड़ा लगा दिया गया और बाणसागर का पानी नहीं आया इससे जरगो जलाशय के सामने पुराने जरगो कमाण्ड और बाणसागर परियोजना द्वारा निर्मित 182 क्यूसेक के अतिरिक्त कमाण्डो के लिए पानी देने की चुनौती बन गई है यही विवाद का मुख्य कारण है।
     इसी बीच नमामि गंगे परियोजना द्वारा नल से जल हेतु 83 एमएलडी पानी प्रतिदिन अर्थात *(एक एमएलडी पानी = दस लाख लीटर)* 10,00000 लीटर × 83 एमएलडी = 83,000000 लीटर पानी प्रतिदिन जल चाहिए। 
     अगर इसे एमसीएफटी में देखेगे तो 8,3000000 लीटर ÷ 2,8310000 *(एक एमसीएफटी में 2 करोड़ 83 लाख 10,000 लीटर)* = 2-93 एमसीएफटी × 365 दिन एक वर्ष = 1069-45 एमसीएफटी *(अर्थात लगभग एक हजार सत्तर एमसीएफटी जल पीने के लिए नल से जल योजना मे प्रतिवर्ष अलग से जरगो जलाशय से जल लेना प्रावधानित हो गया है जो निर्माणाधीन है।)*
     प्रसंग बस यह भी अवगत कराना है कि हमारे जरगो जलाशय की अधिकतम जल संभरण क्षमता 322 फीट अधिकतम ऊंचाई तक रोकने पर 5050 एमसीएफटी क्षमता है परंतु लनभग 60 वर्ष पुरानी डैम हो जाने के कारण अब 318 फिट अधिकतम ऊंचाई तक ही जल रोका जा रहा है जिसमें लगभग 4300 एमसीएफटी मात्र अबजल आता है ऊसमें से भी 1070 एमसीएफटी जल चला जाएगा नल से जल योजना में पेयजल हेतु।

      *ऐसी स्थिति में जरगो जलाशय अपने वर्तमान कमाण्ड की सिंचाई जहां संभालने में कठिनाई महसूस कर रहा है वही उपरोक्त 182 क्यूसेक की बाणसागर की पानी पर आधारित नई सिंचाई परियोजनाएं और नमामि गंगे द्वारा लगभग संपूर्ण बांध के क्षमता का 25% पानी नल से जल योजना में चले जाने के बाद यहां की सिंचाई कैसे होगी ? यह एक यक्ष प्रश्न सामने खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट- राहुल गुप्ता. जिला संवाददाता मीरजापुर
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