•   Sunday, 06 Apr, 2025
Chhath Puja is a festival of sun worship and its glory

छठ पूजा सूर्य उपासना का पर्व और इसकी महिमा

Generic placeholder image
  Varanasi ki aawaz

छठ पूजा सूर्य उपासना का पर्व और इसकी महिमा

आस्था का महापर्व छठ पूजा, जिसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन और पवित्र त्योहार है जो सूर्य देवता और उनकी पत्नी उषा को समर्पित है। यह त्योहार विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें चार दिनों तक श्रद्धालु व्रत, उपवास और सूर्य उपासना करते हैं।

छठ पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है और इसे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि सूर्य देवता की पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य अपनी ऊर्जा और किरणों से संपूर्ण संसार को ऊर्जा प्रदान करते हैं, और छठ पर्व के दौरान उनकी उपासना कर भक्तगण आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

छठ पूजा की मान्यता और कथा

इस पर्व से जुड़ी कई कथाएं हैं जो इसकी महिमा को बढ़ाती हैं। एक प्रमुख कथा के अनुसार, जब पांडवों ने अपना राजपाट खो दिया था, तो द्रौपदी ने छठ पूजा की थी और इस पूजा से उनकी इच्छाएं पूरी हुईं और पांडवों को राजपाट वापस मिला। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि इस पूजा की शुरुआत सत्य युग में हुई थी जब राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी मालिनी ने संतान सुख के लिए सूर्य देवता की पूजा की थी।

वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखा जाए तो छठ पूजा के दौरान सूर्य की किरणों का जल पर पड़ना और उससे होने वाली ऊर्जा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है। यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की महत्ता को भी दर्शाता है।

चार दिन का कठिन व्रत

छठ पूजा का अनुष्ठान चार दिनों तक चलता है और इस दौरान श्रद्धालु कठिन व्रत और उपवास करते हैं। पहले दिन को 'नहाय-खाय' कहा जाता है, जिसमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। दूसरे दिन 'लोहंडा' या 'खरना' होता है, जिसमें व्रतधारी दिनभर निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को अर्घ्य के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। तीसरे दिन 'संध्या अर्घ्य' और चौथे दिन 'उषा अर्घ्य' के साथ व्रत का समापन किया जाता है।

छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अंग अर्घ्य देना होता है, जिसमें डूबते और उगते सूर्य को जल अर्पित कर उन्हें प्रणाम किया जाता है। यह पर्व न केवल सूर्य देव की पूजा का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और सामूहिकता का संदेश भी देता है।

छठ पर्व के दौरान घाटों पर साफ-सफाई, दीप जलाने और पूजा की सभी व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। श्रद्धालु सूर्य देव की कृपा पाने के लिए कठिन तपस्या करते हैं और उनके आशीर्वाद से अपनी जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

रिपोर्ट- मो रिजवान अंसारी. जिला संवाददाता इलाहाबाद
Comment As:

Comment (0)