•   Saturday, 05 Apr, 2025
Maha Kumbh accident Heavy crowd and chaos took the lives of more than 30 devotees CM Yogi got emotio

महाकुंभ हादसा भारी भीड़ और अव्यवस्थाओं ने ली 30 से अधिक श्रद्धालुओं की जान CM योगी भावुक न्यायिक जांच के आदेश

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  Varanasi ki aawaz

महाकुंभ हादसा भारी भीड़ और अव्यवस्थाओं ने ली 30 से अधिक श्रद्धालुओं की जान CM योगी भावुक न्यायिक जांच के आदेश

प्रयागराज:- 30 जनवरी 2025 – महाकुंभ में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान हुई भगदड़ में 30 से अधिक श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 36 से अधिक लोग घायल हो गए। इस त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और न्यायिक जांच के आदेश दिए। हादसे के दौरान बैरिकेड्स टूटने और भीड़ के बेकाबू होने से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। मुख्यमंत्री ने जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार करेंगे। मंगलवार शाम से ही प्रयागराज में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था। बड़ी संख्या में लोग संगम तट पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान अखाड़ा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने लगी, जिससे भगदड़ मच गई। हालात इतने भयावह हो गए कि कई लोग कुचल गए और दम घुटने से बेहोश होकर गिर पड़े।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झूंसी क्षेत्र में भी भगदड़ की स्थिति बनी, लेकिन प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई, लोग अपनों को खोजते रहे। हादसे के बाद कई ट्रैक्टरों में श्रद्धालुओं के कपड़े और सामान बिखरे पड़े थे, जिन्हें जेसीबी से हटाकर क्षेत्र को साफ किया गया। बुधवार देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकार वार्ता के दौरान हादसे का जिक्र करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "इतनी तैयारियों के बावजूद यह हादसा बेहद दुखद है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।" मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को ₹25-25 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की, जबकि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए।


राज्यपाल ने इस घटना की गहन जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की। आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार करेंगे, जबकि पूर्व डीजी वी.के. गुप्ता और पूर्व आईएएस अधिकारी डी.के. सिंह को सदस्य बनाया गया है। यह आयोग एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें हादसे के कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर सुझाव दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में करीब 8 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने प्रयागराज के आसपास के जनपदों मिर्जापुर, भदोही, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी में होल्डिंग एरिया बनाए थे, लेकिन इसके बावजूद प्रयागराज में भीड़ का दबाव बना रहा। रेलवे ने 300 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाईं और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने 8000 से अधिक बसें संचालित कीं, फिर भी व्यवस्था चरमरा गई।


हादसे के बाद श्रद्धालुओं ने अव्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जाहिर की। कई लोगों ने वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाए, जहां वीआईपी मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए आम श्रद्धालुओं को रोका गया, जिससे अन्य मार्गों पर दबाव बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस-प्रशासन हादसे के बाद काफी देर तक स्थिति संभालने में असमर्थ रहा।


मुख्यमंत्री ने आगामी 3 फरवरी को बसंत पंचमी स्नान के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव और डीजीपी प्रयागराज का दौरा कर मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे। कुंभ 2019 के दौरान प्रयागराज के मंडलायुक्त रहे आशीष गोयल और एडीए के तत्कालीन वीसी भानु गोस्वामी की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा, विशेष सचिव स्तर के 5 अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को भी नियुक्त किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए। प्रयागराज के सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग एरिया बनाकर श्रद्धालुओं को नियंत्रित किया जाए। सभी रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। किसी भी मार्ग पर जाम की स्थिति न बनने पाए। मेला क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स को सुव्यवस्थित तरीके से बसाया जाए। CCTV और ड्रोन के जरिए भीड़ की निगरानी की जाए।

यह हादसा महाकुंभ जैसे विराट आयोजन के दौरान भीड़ प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद इस हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

फिलहाल, सरकार की प्राथमिकता सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। प्रशासन की सतर्कता और बेहतर योजना ही कुंभ जैसे भव्य आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बना सकती है।

रिपोर्ट- मो रिजवान अंसारी. जिला संवाददाता इलाहाबाद
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