•   Saturday, 05 Apr, 2025
Priority given to devotees who completed Mauni Amavasya Amrit Snan Akharas performed symbolic bath

मौनी अमावस्या अमृत स्नान सम्पन्न श्रद्धालुओं को प्राथमिकता अखाड़ों ने किया सांकेतिक स्नान

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  Varanasi ki aawaz

मौनी अमावस्या अमृत स्नान सम्पन्न श्रद्धालुओं को प्राथमिकता अखाड़ों ने किया सांकेतिक स्नान

प्रयागराज:- महाकुंभ नगर, 29 जनवरी: महाकुंभ के दूसरे अमृत स्नान पर्व, मौनी अमावस्या, पर आस्था का सैलाब उमड़ा। प्रशासन के अनुसार, शाम 6 बजे तक करोड़ों श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। महाकुंभ में घटी हालिया घटना के बाद अखाड़ों के संतों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पहले श्रद्धालुओं को स्नान का अवसर दिया और बाद में स्वयं सांकेतिक रूप से अमृत स्नान किया।

महाकुंभ में अमृत स्नान के दौरान आमतौर पर अखाड़ों के साधु-संत और नागा संन्यासी ब्रह्म मुहूर्त में प्रथम स्नान करते हैं, लेकिन इस बार परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपनी ऐतिहासिक परंपरा को तोड़ दिया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि श्रद्धालुओं को पहले स्नान करने दिया जाए और स्थिति सामान्य होने के बाद ही अखाड़ों द्वारा सांकेतिक स्नान किया जाए।

अखाड़ों के इस फैसले से श्रद्धालुओं को संगम में सुचारू रूप से अमृत स्नान करने का अवसर मिला। प्रशासन ने भी अखाड़ों के इस कदम की सराहना की और व्यवस्था को संभालने में इसे एक सकारात्मक निर्णय बताया।

मौनी अमावस्या स्नान के इस पावन अवसर पर देश के तीन प्रमुख पीठों के शंकराचार्यों ने भी त्रिवेणी संगम में स्नान किया। श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती, द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पूरे विधि-विधान के साथ संगम में डुबकी लगाई।

तीनों शंकराचार्य मोटर बोट के माध्यम से संगम पहुंचे और वहां धार्मिक अनुष्ठान के बाद स्नान कर देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम और शांति बनाए रखने की अपील भी की।

प्रशासन के मुताबिक, महाकुंभ के इस दूसरे अमृत स्नान पर्व पर संगम तट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ा। करोड़ों श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाकर अपने जीवन को पावन बनाने की कामना की। स्नान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन लगातार निगरानी रखे हुए था।

अखाड़ों के निर्णय और श्रद्धालुओं के संयम ने इस पर्व को और अधिक गरिमामयी बना दिया। महाकुंभ के आगामी स्नान पर्वों के लिए भी प्रशासन और धार्मिक संगठनों ने सहयोगात्मक रवैया अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।

रिपोर्ट- मो रिजवान अंसारी. जिला संवाददाता इलाहाबाद
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